यह खबर काफी बड़ी है क्योंकि दीपिंदर गोयल ने जोमैटो (अब इटरनल लिमिटेड) के ग्रुप CEO का पद छोड़ने का फैसला किया है।
हुआ क्या है?
- कुर्सी बदली: दीपिंदर गोयल अब ग्रुप CEO नहीं रहेंगे। उनकी जगह अलबिंदर ढींढसा (जो अभी ब्लिंकिट के बॉस हैं) अब पूरी कंपनी (Eternal) की कमान संभालेंगे।
- दीपिंदर का नया रोल: वह पूरी तरह कंपनी नहीं छोड़ रहे हैं। वह वाइस चेयरमैन बने रहेंगे और बोर्ड का हिस्सा होंगे। वह कंपनी के कल्चर, लंबी अवधि की प्लानिंग और बड़े फैसलों में सलाह देते रहेंगे।
उन्होंने यह फैसला क्यों लिया?
दीपिंदर ने इसके पीछे दो बड़े कारण बताए हैं:
- नए और रिस्की आइडिया: उनका मन कुछ ऐसे नए बिजनेस आइडिया पर काम करने का है जिनमें रिस्क ज्यादा है। एक पब्लिक कंपनी (जिसके शेयर बाजार में हों) के CEO होने के नाते उन्हें बहुत अनुशासन में रहना पड़ता है। इसलिए वो इन नए आइडियाज को कंपनी के बाहर रहकर आज़माना चाहते हैं ताकि कंपनी के बिजनेस पर कोई आंच न आए।
- कानूनी जिम्मेदारी: भारत में एक पब्लिक कंपनी के CEO पर बहुत सारी कानूनी जिम्मेदारियां होती हैं, जिसके लिए पूरा ध्यान एक ही जगह लगाना पड़ता है। दीपिंदर चाहते हैं कि वह कंपनी के कामकाज से थोड़ा हटकर भविष्य की नई चीजों को एक्सप्लोर कर सकें।
खास बातें जो आपको जाननी चाहिए:
- पैसों का त्याग: दीपिंदर ने अपने हिस्से के ESOPs (शेयर विकल्प) वापस कंपनी के फंड में डाल दिए हैं। इसका मतलब है कि वह अपने लिए धन जोड़ने के बजाय चाहते हैं कि वह पैसा कंपनी के अगले लीडर्स को रोकने और उन्हें आगे बढ़ाने के काम आए।
- कंपनी की सेहत: यह खबर तब आई है जब कंपनी (खासकर ब्लिंकिट) काफी अच्छा मुनाफा कमा रही है। यानी कंपनी डूब नहीं रही, बल्कि वह एक मजबूत स्थिति में यह बदलाव कर रहे हैं।
- टीम वर्क: वह अभी भी कंपनी के CFO अक्षत गोयल और नए CEO अलबिंदर के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।
निष्कर्ष:
निष्कर्ष: आसान शब्दों में कहें तो, दीपिंदर अब “मैनेजर” वाली भूमिका से हटकर एक “मेंटर” और “इन्वेस्टर” की तरह काम करना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि ब्लिंकिट के अलबिंदर रोजमर्रा का काम संभालें, जबकि वह खुद भविष्य के नए रिस्की आइडियाज पर काम कर सकें।





