गणतंत्र दिवस 2026: ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष और सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन।

भारत ने आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस अत्यंत हर्षोल्लास और गौरव के साथ मनाया। गणतंत्र दिवस 2026 का यह अवसर न केवल हमारे संविधान की शक्ति का प्रतीक बना, बल्कि इसने वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य कद को भी रेखांकित किया। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित इस भव्य समारोह ने स्वदेशी तकनीक और सांस्कृतिक विरासत का एक अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

मुख्य अतिथि और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति

इस वर्ष के गणतंत्र दिवस 2026 समारोह की गरिमा को बढ़ाने के लिए यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की उपस्थिति ने भारत-यूरोपीय संघ के मजबूत होते संबंधों को दर्शाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ध्वजारोहण के साथ इस ऐतिहासिक परेड का आगाज़ हुआ, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अतिथियों का स्वागत किया।

मुख्य विषय: ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष का उत्सव

इस वर्ष की परेड का सबसे भावनात्मक और गौरवशाली पक्ष इसका मुख्य विषय (Theme) था—वंदे मातरम’ के 150 वर्ष। ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों भारतीयों में राष्ट्रवाद की अलख जगाई थी।

  • पूरे कर्तव्य पथ को डिजिटल और पारंपरिक कलाकृतियों के माध्यम से ‘वंदे मातरम’ की गाथा से सजाया गया था।
  • परेड की शुरुआत में विशेष संगीत टुकड़ियों ने इस गीत की धुनों पर मार्च किया, जिससे पूरा वातावरण देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया।

सैन्य शक्ति का प्रदर्शन और ‘ऑपरेशन सिंदूर’

गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में भारत ने अपनी ‘अजेय’ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया। इस बार का आकर्षण ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और उसमें उपयोग किए गए घातक हथियारों पर केंद्रित रहा।

1. आधुनिक हथियार और रक्षा प्रणाली

परेड में उन हथियारों को प्रमुखता से दिखाया गया जिन्होंने सीमा सुरक्षा और हालिया ऑपरेशनों में निर्णायक भूमिका निभाई:

  • ब्रह्मोस मिसाइल: दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल।
  • S-400 एयर डिफेंस सिस्टम: आसमान में अभेद्य दीवार बनाने वाली तकनीक।
  • आकाश मिसाइल सिस्टम: कम दूरी की रक्षा प्रणाली का स्वदेशी गौरव।

2. आत्मनिर्भर भारत और ‘सूर्यास्त्र’

स्वदेशी तकनीक की शक्ति दिखाते हुए ‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट लॉन्चर और ‘अर्जुन’ मेन बैटल टैंक ने दर्शकों का ध्यान खींचा। पहली बार भारतीय सेना ने ‘बैटल एरे फॉर्मेट’ का लाइव प्रदर्शन किया, जिसमें ड्रोन तकनीक और टैंकों के बीच सटीक तालमेल दिखाया गया कि कैसे आधुनिक युद्ध के मैदान को नियंत्रित किया जाता है।

झांकियां और सांस्कृतिक विविधता

भारत की ‘विविधता में एकता’ को दर्शाते हुए इस वर्ष कुल 30 झांकियां निकाली गईं।

  • राज्यों की झलक: 17 राज्यों की झांकियों में केरल की ‘वॉटर मेट्रो’ और तमिलनाडु की ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’ ने भविष्य के भारत की तस्वीर पेश की।
  • मंत्रालयों का योगदान: 13 मंत्रालयों की झांकियों ने भारत के डिजिटल मिशन और स्पेस प्रोग्राम की उपलब्धियों को दर्शाया।
  • कलाकारों का संगम: देशभर के लगभग 2,500 कलाकारों ने लोक नृत्यों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक आत्मा को कर्तव्य पथ पर जीवंत कर दिया।

आसमान में गर्जना: फ्लाई-पास्ट

समारोह का समापन भारतीय वायुसेना के रोमांचक फ्लाई-पास्ट के साथ हुआ। राफेल, सुखोई-30 MKI और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों ने आसमान में ‘वज्रांग’ और ‘विजय’ जैसी जटिल आकृतियां बनाईं। बादलों को चीरते हुए इन विमानों की गर्जना ने देश की सुरक्षा के प्रति नागरिकों में विश्वास भर दिया।

निष्कर्ष

गणतंत्र दिवस 2026 का यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी जड़ों (वंदे मातरम) से जुड़े रहते हुए आधुनिकता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। सैन्य आत्मनिर्भरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के इस मेल ने विश्व को ‘सशक्त भारत’ का संदेश दिया है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version